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नेहा ‘एक प्रेरणा’

तृप्ति तोमर `तृष्णा`
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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अंदाज इनका जटिल,अलग और सटीक,
व्यक्तित्व है सहज,सौंदर्य का प्रतीक।

मौन मूर्ति-सी मूरत है जिनकी,
सबसे जुदा है शख्सियत इनकी।

गागर में सागर-सी इनकी उपमा,
झलके तो बिखरे इनकी गारिमा।

जहाँ जाती हैं बनाती हैं अपनी अलग ही पहचान,
परिश्रम,कला,कर्मठता से मिला मान-सम्मान।

प्रकाश से रोशन रहे इनका संपूर्ण जीवन,
मिले सदा खुशियों से महके उपवन।

समर्पण है जिनका परिचायक का प्रतिरूप,
निष्ठा,ईमानदारी है जिनका जीता-जागता स्वरूप।

राह में ना आये कभी कोई अड़चन,
हमेशा महकता रहे इनका हर पलझिन।

जहाँ तक फैला गगन धरा का छोर,
यश,कीर्ति का रास्ता मिले हर ओर॥

परिचय-तृप्ति तोमर पेशेवर लेखिका नहीं है,पर प्रतियोगी छात्रा के रुप में जीवन के रिश्तों कॊ अच्छा समझती हैं।यही भावना इनकी रचनाओं में समझी जा सकती है। आपका  साहित्यिक उपनाम-तृष्णा है। जन्मतिथि २० जून १९८६ एवं जन्म स्थान-विदिशा(म.प्र.) है। वर्तमान में भोपाल के जनता नगर-करोंद में निवास है। प्रदेश के भोपाल से ताल्लुक रखने वाली तृप्ति की लेखन उम्र तो छोटी ही है,पर लिखने के शौक ने बस इन्हें जमा दिया है। एम.ए. और  पीजीडीसीए शिक्षित होकर फिलहाल डी.एलएड. जारी है। आप अधिकतर गीत लिखती हैं। एक साझा काव्य संग्रह में रचना प्रकाशन और सम्मान हुआ है। 

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