रचना पर कुल आगंतुक :170

You are currently viewing परिवार

परिवार

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’
रायपुर(छत्तीसगढ़)
*******************************************

यह परिवार कहीं टूटे न,
इसका होना भाग्य है
माले की तरह पिरो रखें,
निज कर्त्तव्य ही सौभाग्य है।

लोगों के इस झुण्ड में,
सब रिश्ते-नाते खो गए
हुआ करते थे जो अपने,
वही बेगाने अब हो गए।

मतलब के संसार में,
छल रहे वो अपने हैं
अधरों पर झूठी मुस्कान सजे,
प्रीत एकता सपने हैं।

घर के आँगन सुरभित हो,
सबको सुंदर परिवार मिले
डालें बीज संस्कार का,
बगिया भाँति सदा खिले।

सुख-दु:ख में बने सहारा,
नेह बंध आधार है।
पल-पल प्रेम बौछार से,
फले-फूले परिवार है।

घर शोभित परिवार से,
सदा करें सत्कार।
अपनों का साथ मिले,
खुशियाँ फैले द्वार॥

परिचय- श्रीमति डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’ का जन्म स्थान जिला रायगढ़(छग)स्थित खुड़बेना (सारंगढ़) तथा तारीख २५ मई १९८५ है। वर्तमान में रायपुर स्थित कैपिटल सिटी (फेस-३) सड्डू में निवासरत हैं,जबकि स्थाई पता-जैजैपुर (बाराद्वार-जिला जांजगीर चाम्पा,छग) है। छत्तीसगढ़ राज्य निवासी श्रीमती चंद्रा ने एम.ए.(हिंदी),एम.फिल.,सेट (हिंदी) सी.जी.(व्यापमं) की शिक्षा हासिल की है। पीएच.-डी.(हिंदी व्यंग्य साहित्य) भी कर चुकी हैं। गृहिणी व साहित्य लेखन ही इनका कार्यक्षेत्र है। लेखन विधा-कहानी,कविता,लेख(हिंदी,छत्तीसगढ़ी) और निबन्ध है। विविध रचनाओं का प्रकाशन कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में छत्तीसगढ़ सहित अन्य में हुआ है। आप ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-विभिन्न साहित्यिक राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भागीदारी,शोध-पत्र,राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में १३ शोध-पत्र प्रकाशन व साहित्यिक समूहों में सतत साहित्यिक लेखन है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा को लोगों तक पहुँचाना व साहित्य का विकास करना है।

Leave a Reply