कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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अब तो नजरों में बस राम बसे हैं,
नजरों में बस श्रीराम ही नजर आते हैं
जान चली भी जाए क्या गम मुझको,
गंगा धाम में श्रीराम ही तो मिलते हैं।
यादों के तरकशों पर बस राम-राम नाम रहता है,
डायरी के पुराने पन्नों को पलटो तो हनुमान जी की गाथा ही नजर आती है
कोई अपना आए ना आए और बात है,
श्रीराम नैनों में बसे रहें, बस यही खास बात है।
जिसे अपना समझा उन्हें याद कर रोई,
आँखें बंद भी करूँ तो श्रीराम को याद कर रोई
अब तो तमन्ना है बनारस घाट एक बार जाऊँ,
जहां गंगा में पाँच बार डुबकी लगाऊँ।
भोलेनाथ को जलाभिषेक करके,
वहीं का बस प्रसाद सब मिल जाए।
जब से श्रीराम को पाया है जग में,
हर एक साँस में बस श्रीराम-श्रीराम रहता है॥