लखनऊ (उप्र)।
स्मृतिशेष डॉ. शम्भूनाथ की प्रथम पुण्यतिथि पर पारस वेला न्यास, कबीर शांति मिशन तथा डॉ. शम्भूनाथ के परिवार के संयुक्त तत्वावधान में कबीर शांति मिशन (गोमती नगर) में स्मृति समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. शम्भू नाथ की कृति ‘फिर आई याद कबीर की’, डॉ. अनिल कुमार पाठक की ‘मम त्रैलोक्यम्’ तथा डॉ. शम्भूनाथ पर केंद्रित स्मृति-ग्रन्थ ‘शम्भू सुरभि’ पुस्तक का विमोचन किया गया।
‘शम्भू सुरभि’ में डॉ. शम्भूनाथ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न पक्षों का सम्पादन डॉ. पाठक ने किया है। सेवानिवृत्त आई.ए.एस. डॉ. डी.एन. लाल ने डॉ. शम्भूनाथ से जुड़ी स्मृतियाँ साझा कीं।
कार्यक्रम में डॉ. नाथ की पत्नी चन्दानाथ ने बताया कि कबीर पर पुनः कुछ लिखने का मेरा आग्रह था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। मुख्य अतिथि प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि शम्भूनाथ जी का समग्र व्यक्तित्व एक कुशल प्रशासक का था। उनके व्यक्तित्व का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष साहित्यकार का था। उन्होंने संवेदना के धरातल पर उतरकर अनेक काव्य-कृतियाँ रचीं।अध्यक्षता करते हुए हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि डॉ. नाथ बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी होने के बावजूद अत्यन्त निरभिमानी थे। आपने दिनकर साहित्य में उनके योगदान का उल्लेख किया।
कुशल संचालन डॉ. पाठक ने किया।