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बचपन न छीनें

विनोद वर्मा आज़ाद
देपालपुर (मध्य प्रदेश) 

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व्यावसायिकता के इस समय में अशासकीय शिक्षण संस्थान बच्चों का बचपन फीस के लिए न छीनें तो अच्छा हैl बच्चों को मामा-भुआ के यहां जाने दें चाहिएl हम जब पढ़ते थे,तो दीपावली-दशहरा की २४ दिन की छुट्टी,बड़े दिन की ८ दिन की छुट्टी मिलती थी,और ३० अप्रैल को परीक्षा परिणाम आते थे। बहुत सारे त्यौहारों की छुट्टियां होने के बावजूद अच्छा परिणाम आता था। तब विद्यालय जाने पर व्यायाम करवाया जाता था, खेलकूद होते थे,प्रत्येक जयन्ति,त्योहार मनाने के साथ,वार्षिकोत्सव, पुरस्कार वितरण,भोज आदि हुआ करते थे। छुट्टी वाले दिन खेतों में गुलाम डाला खेलने चले जाते थे। जंगली फल,बेर,कच्ची केरी,इमली के चव्वे,पकी इमली,गलतान इमली,कबीट,जामुन तोड़कर,गन्ना,गन्ने का रस,गुड़ बनाने के वक्त रस की मलाई भी खाकर आते थे,फिर भी परीक्षा परिणाम अच्छा आता था….तो फिर क्यों आज बच्चों का बचपन मात्र फीस के लिए क्यों छीना जा रहा है।
सभी शाला प्रबंधकों से निवेदन है कि अप्रैल,मई,जून में अपनी कक्षाएं पूर्ण रूप से बंद रखें। बेवजह के पाठ्यक्रम के कारण गर्मी में बच्चों को परेशान ना करें। पढ़ाई के लिए तो ९ माह ही बहुत होते हैं। पढ़ाई हमने भी की है,पाठ्यक्रम में कुछ नया नहीं जुड़ा हैl अनुरोध है कि कृपया बच्चों से उनका बचपन ना छीनें। नाना मामा का घर,नानी का प्यार,गर्मी की छुट्टियों का आनंद,आपकी ३ घंटे की कक्षा के कारण धूमिल होता जा रहा है। सभी अभिभावकों के मन की बात सुनें,समझें और शिक्षा का व्यापार खत्म करेंl यह अभियान अब सभी पालकों को चलाना ही पड़ेगाl

परिचय-विनोद वर्मा का साहित्यिक उपनाम-आज़ाद है। जन्म स्थान देपालपुर (जिला इंदौर,म.प्र.) है। वर्तमान में देपालपुर में ही बसे हुए हैं। श्री वर्मा ने दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर सहित हिंदी साहित्य में भी स्नातकोत्तर,एल.एल.बी.,बी.टी.,वैद्य विशारद की शिक्षा प्राप्त की है,तथा फिलहाल पी.एच-डी के शोधार्थी हैं। आप देपालपुर में सरकारी विद्यालय में सहायक शिक्षक के कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत साहित्यिक,सांस्कृतिक क्रीड़ा गतिविधियों के साथ समाज सेवा, स्वच्छता रैली,जल बचाओ अभियान और लोक संस्कृति सम्बंधित गतिविधियां करते हैं तो गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षण सामग्री भेंट,निःशुल्क होम्योपैथी दवाई वितरण,वृक्षारोपण,बच्चों को विद्यालय प्रवेश कराना,गरीब बच्चों को कपड़ा वितरण,धार्मिक कार्यक्रमों में निःशुल्क छायांकन,बाहर से आए लोगों की अप्रत्यक्ष मदद,महिला भजन मण्डली के लिए भोजन आदि की व्यवस्था में भी सक्रिय रहते हैं। श्री वर्मा की लेखन विधा -कहानी,लेख,कविताएं है। कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचित कहानी,लेख ,साक्षात्कार,पत्र सम्पादक के नाम, संस्मरण तथा छायाचित्र प्रकाशित हो चुके हैं। लम्बे समय से कलम चला रहे विनोद वर्मा को द.साहित्य अकादमी(नई दिल्ली)द्वारा साहित्य लेखन-समाजसेवा पर आम्बेडकर अवार्ड सहित राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा राज्य स्तरीय आचार्य सम्मान (५००० ₹ और प्रशस्ति-पत्र), जिला कलेक्टर इंदौर द्वारा सम्मान,जिला पंचायत इंदौर द्वारा सम्मान,जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा सम्मान,भारत स्काउट गाइड जिला संघ इंदौर द्वारा अनेक बार सम्मान तथा साक्षरता अभियान के तहत नाट्य स्पर्धा में प्रथम आने पर पंचायत मंत्री द्वारा १००० ₹ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही पत्रिका एक्सीलेंस अवार्ड से भी सम्मानित हुए हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-एक संस्था के जरिए हिंदी भाषा विकास पर गोष्ठियां करना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा के विकास के लिए सतत सक्रिय रहना है।