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बचपन सुहाना

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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बचपन था कितना सुहाना,
गमों से था मैं तब अनजाना
मानता था मैं पिता का कहना,
पढ़ना खेलना और मौज मनाना।
बचपन था कितना सुहाना…

आता याद मुझे बचपन का जमाना,
प्यारा था कितना गुरुजी का डांटना
डांटना-पीटना और दुलार से समझाना,
सफलताओं में उनसे पुरस्कार पाना।
बचपन था कितना सुहाना…

आता याद मुझे मेरा बहाना,
सुनते ही माँ का स्वत: समझना
गलतियों में भी उनका दुलारना,
आँचल में स्वर्ग-सा सुख पाना
पिता की नाराजगी से बचाना।
बचपन था कितना सुहाना…

बचपन में जब होता था बीमार,
संजीवनी लाने पिता रहते तैयार
करतीं माता दिन-रात सेवा सुसार,
मिलता मुझे सबका ही मधुर प्यार
भाई बचपन था मेरा बड़ा मजेदार।
बचपन था कितना सुहाना…

आतीं याद मुझे अपनी दादी-नानी,
भूला नहीं हूँ अभी उनकी कहानी
उनकी बातें छोटी-लम्बी और पुरानी,
सुनते ही हमें याद रहती जुबानी
आतीं याद मुझे अपनी दादी नानी।
बचपन था कितना सुहाना…

आजकल देख मुझे हॊता है :दुख,
अभावों में छिनता बचपन का सुख
बेटी के साथ बेटे से अलग रूख,
बेटी के जन्म पर सबका दुखित रूप
देख मुझे हॊता है दु:ख,
छिनता बचपन का सुख।
बचपन था कितना सुहाना…

कहता ‘राजू’ बचपन का है ना कोई तोड़,
किसी भी अवस्था में नहीं इनका जोड़
आओ सब मिल लगायें जोर,
असहाय गरीब और लाचार
बेटा,बेटी या हो कोई और,
सब बचपन को जी लें पुरजोर।
सब बचपन को जी लें पुरजोर,
बचपन था कितना सुहाना…॥

परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव- लोहापिटटी में हैl जन्मतारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद हैl भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन(डिप्लोमा)की शिक्षा प्राप्त की हैl साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी(विद्यालय में शिक्षक) हैl सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैंl लेखन विधा-कविता एवं लेख हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना हैl पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैंl विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।