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बाबुल तेरे अंगना में

रुपा कुमारी
हावड़ा(पश्चिम बंगाल)
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बाबुल तेरे अंगना में,
मैं मस्त हवा का झोंका हूँ।
बाबुल तेरे शहर में,
मैं परियों की शहजादी हूँ।

बाबुल तेरे अंगना की,
मैं चहकती पंछी हूँl
बाबुल तेरे बागों में,
मैं महकता फूल हूँ।

बाबुल तेरे अंगना में,
मुझे पल-पल तेरा प्यार मिला।
बाबुल तेरे शहर में,
संग सबका मुझे दुलार मिला।

बाबुल अपने अंगना से,
दूर न करना मुझको तू।
बाबुल अपनी अँखियों से,
कहीं बहा न देना मुझको तू।

बाबुल तेरे अंगना में,
मैं मस्त हवा का झोंका हूँ।
बाबुल तेरे शहर में,
मैं परियों की शहजादी हूँl

छोड़ पिया का साथ मैं,
दौड़-दौड़ कर आऊंगी।
बाबुल तेरे अंगना से,
दूर कहीं न जाऊंगीll

परिचय-रुपा कुमारी का बसेरा पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित पहचानतला मार्ग पर है। आपकी जन्मतिथि २९ अप्रैल २००२ एवं जन्म स्थान बिहार है। स्थाई पता भी पहचानतला मार्ग ही है। रुपा कुमारी फिलहाल वाणिज्य विषय से कक्षा १२ वीं में अध्ययनरत हैं। इनकी लेखन विधा-कविता है। कार्यक्षेत्र में विद्यार्थी हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति से सामाजिक चेतना को जागृत करते रहना है।