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बेटी दो कुल का मान होती है

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’ 
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

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परी जैसी सलोनी-सी बड़ी नादान
होती है,
चले आँगन में जब बेटी वो घर की शान
होती है।
विधाता की अलौकिक शक्ति का वरदान
है बेटी,
जनम लेती है जिस घर में वहाँ मेहमान
होती है॥

कभी गुड़िया से गुड्डा की जो ख़ुद शादी
रचाती थी,
कभी जो तोतली भाषा में क ख ग
सुनाती थी।
करे माँ-बाप की सेवा,लड़े-झगड़े जो
भाई से,
बड़ी होने पे घर को छोड़ कर ससुराल
जाती है॥

बहुत मज़बूत नाता है जो रेशम का
कलाई से,
बहुत भाई भी रोता है बहन की हाँ
जुदाई से।
रखे जो मान दो कुल का बहुत प्यारी-
सी होती है,
रहे वो दूर जब हमसे वो दिल के पास
होती है॥

परिचय-डॉ.नीलिमा मिश्रा का साहित्यिक नाम नीलम है। जन्म तारीख १७ अगस्त १९६२ एवं जन्म स्थान-इलाहाबाद है। वर्तमान में इलाहाबाद स्थित साउथ मलाका (उत्तर प्रदेश) बसी हुई हैं। स्थाई पता भी यही है। आप एम.ए. और पी-एच.डी. शिक्षित होकर केन्द्रीय विद्यालय (इलाहाबाद) में नौकरी में हैं। सामाजिक गतिविधि के निमित्त साहित्य मंचन की उपाध्यक्ष रहीं हैं। साथ ही अन्य संस्थाओं में सचिव और सदस्य भी हैं। इनकी लेखन विधा-सूफ़ियाना कलाम सहित ग़ज़ल,गीत कविता,लेख एवं हाइकु इत्यादि है। एपिग्रेफिकल सोसायटी आफ इंडिया सहित कई पत्र-पत्रिका में विशेष साक्षात्कार तथा इनकी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। ब्लॉग पर भी लिखने वाली डॉ. मिश्रा की विशेष उपलब्धि-विश्व संस्कृत सम्मेलन (२०१५,बैंकाक-थाईलैंड)और कुम्भ मेले (प्रयाग) में आयोजित विश्व सम्मेलन में सहभागिता है। लेखनी का उद्देश्य-आत्म संतुष्टि और समाज में बदलाव लाना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-डॉ. कलीम कैसर हैं। इनकी विशेषज्ञता-ग़ज़ल लेखन में है,तो रुचि-गायन में रखती हैं।