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बेरोजगारी,मंहगाई की प्रगति बताएं प्रधानमंत्री

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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चुनाव २०१९ अपनी चरम सीमा पर है,और इस समय सब जगह भाषा की नीचता बहुत उच्चता पर हैl भाषा का स्तर इतना अधिक इतना गिर चुका है कि यह चुनाव विकास और योजनाओं पर न होकर गाली-गुफ़्ता पर होना चाहिएl गाली से मूल समस्याओं से ध्यान भटकाया जा सकता है,वैसे सब श्रेष्ठ और ईमानदार हैं और सब काबिल हैं देश संचालन मेंl
स्थिति चिंताजनक इतनी अधिक है कि चुनाव का स्तर बहुत घटियाजनक हैl कोई भी नेता अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप पर लगते ही दिल खोलकर एक-दूसरे की परतें खोल रहे हैं और वो ही चुनाव का मुख्य आधार हैl सब पार्टियों के पास कार्यकर्ताओं और तकनीकी लोगों की बहुत बड़ी भीड़ हैl चुनाव में एक-एक उम्मीदवार करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं,जितना अधिक नियंत्रण,उतना अधिक लाभl
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में सब बातों की चर्चा करते हैं,पर देश की मूल समस्या पर कोई चर्चा नहीं करते और यदि बोलेंगे तो सिर्फ झूठे आँकड़े बताकर ताली बजवाते हैंl सच्चाई नहीं बताते हैंl आज एक पत्र में प्रकाशित समाचार में यह जानकारी मिली कि मोदी सरकार के कार्यकाल में ६१ प्रतिशत मंहगाई बढ़ी और ४२ प्रतिशत भ्रष्टाचार बढ़ा और रोजगार के अवसर घटे,यानि बेरोजगारी बढ़ी हैl मोदी सरकार ने भी स्वीकार किया है कि देश में शिक्षा,स्वास्थ्य और किसानों की समस्या पर कोई सुधार नहीं हुआl शौचालयों की स्थिति भौतिक रूप से सही नहीं हैl इसमें सरकार ने अधिकतम ठेका पार्टी और नेताओं को देकर उपकृत किया,जिससे उनकी जांच की जाना संभव नहीं हैl सरकारी भवन निर्माण की स्थिति और भी दयनीय है,भौतिक सत्यापन में आंकड़े कुछ और हैंl
अमेरिका की एक पत्रिका ने यह कह दिया कि,सेना ने पाकिस्तान का कोई भी मिग-१६ विमान नहीं मार गिराया,इस पर भी विवाद हैl कहीं अपनी बड़ाई के लिए आंकड़ों की बाज़ीगरी ने सब रिकार्ड तोड़े,जीएसटी और नोटबंदी के कारण हुए नुकसान की कोई बात नहीं करते हैंl कितनों का व्यापार ख़त्म हुआ और कितनों ने आत्महत्या की,इसकी कोई बात नहीं हो रही हैl
पूर्व सरकार के किये कामों पर अपनी प्रगति बताना और यदि कुछ गड़बड़ हुई,तो पुरानी सरकार पर ठीकरा फोड़ना यह उनकी फितरत हैl कारण उनको उनके संस्कार प्रेरित करते हैंl अपनी हठवादिता के कारण अन्य को बेदर्दी से पार्टी से हाशिए पर किया,यह उनकी इच्छाशक्ति और आत्मबल का परिचायक हैl उनकी निर्णय लेने की क्षमता के साथ लगातार काम करना उनका देश के प्रति समर्पण बताता है,और जिस प्रकार दीमक रात-दिन कार्य कर खोखला कर देती है,वैसी ही मोदी सरकार ने देश को झूठी शान के कारण खोखला किया और उन्होंने जिस तरह वरिष्ठों को दरकिनार किया,वह उनकी दृढ़ शक्ति बताती हैl
हमें उनकी विदेशों में सम्मान से उतना मतलब नहीं है, मतलब है नौकरी देना,मंहगाई कम होना,भ्रष्टाचार कम होना और गरीबी का कम होना,इस पर उनके विचार नहीं सुनने मिल रहे,क्योंकि इन क्षेत्रों में कोई प्रगति या विकास नहीं हुआ,मात्र लफ्फाजी से काम नहीं होगाl एक बात निश्चित है,कि इस बार उनको भी पदच्युत होना चाहिए,जिससे उनकी अपनी वास्तविक स्थिति पता चलेगी,और उनको उनकी औकात पता चलेंगी,क्योकि अब झूठ के सुनने की हिम्मत देशवासियों की नहीं हैंl सरकारी आँकड़े कुछ अलग बताते,और धरातल पर कुछ और है,वैसे हर पांच साल में तालाब का पानी बदलते रहना चाहिए,जिससे उनकी जड़ मजबूत न होl

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।