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भगवान परशुराम की महिमा से ऊर्जान्वित हुई कल्पकथा काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)।

कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में २४५वीं साप्ताहिक काव्य गोष्ठी का गरिमामय आयोजन ‘जय भगवान परशुराम’ विषय पर हुआ। अध्यक्षता सिवनी (मप्र) की सुप्रसिद्ध कवयित्री कविता नेमा ‘काव्या’ ने की। मुख्य अतिथि लखनऊ (उप्र) से लोक जागृति कार्यशाला की संस्थापक श्रीमती साधना मिश्रा ‘विंध्य’ रही।
संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया, कि आयोजन साहित्य एवं आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसमें प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने ओजस्वी प्रस्तुतियों से वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। शुभारंभ प्रतिभावान साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के साथ श्रद्धापूर्ण वातावरण में किया गया। यह कार्यक्रम २ चरणों में सतत् चला। इस दौरान देशभर से जुड़े साहित्यकारों— सुरेश कुमार वर्मा रातावाल, डॉ. सरिता गर्ग सरि, कीर्ति त्यागी, ज्योति प्यासी, पं. अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, संध्या श्रीवास्तव ‘साँझ’, रमापति मौर्य नंदकिशोर बहुखंडी, डॉ. मंजू शकुन खरे, श्रीमती संतोष मिश्रा, भावना भारद्वाज, विजया तिवारी, साधना मिश्रा विंध्य, राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र सहित अनेक रचनाकारों ने भगवान परशुराम के अद्वितीय व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समापन सत्र में राष्ट्रभक्ति की भावना को समर्पित राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया, जिससे वातावरण राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत हो उठा।
मंच संचालन में प्रथम चरण का दायित्व पवनेश मिश्र एवं द्वितीय का गोरखपुर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्याम बिहारी मिश्र ने प्रभावपूर्ण रूप से निर्वहन किया। संस्थापक श्रीमती राधाश्री शर्मा ने अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं दर्शकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।