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महक हूँ गीली माटी की

अमृता सिंह
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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हूँ महक गीली मिट्टी की…
कभी तेज़ तपिश भी सूरज-सी…
भादो की हूँ रिमझिम फुहार भी मैं….
तेज़ चमक भी बिजली-सी।
शीतल सलोनी छाया भी मैं…
हूँ सात सुरों का साथ कभी,
कभी पूर्वइया सावन की तो….
मीठी-सी धुन गीतों की कभी।
हूँ आहट कभी कंपन की…
तो कभी हूँ काली छाया भी…
नहीं क्या हक़ जीने का मुझे…!
या पीछे छोड़ आई जीना कहीं।
फिर…एक दिन मैं गरज उठी…
घायल बाघिन-सी मैं दहाड़ उठी…
कतरा-कतरा बटोर के खुद को…
नित-निरंतर बढ़ी चली।
थे जो गिनने वाले…
मुझमें कमियाँ…।
हाथ पर हाथ…धरे…
नतमस्तक से खड़े हैं क्यों ?

परिचय–अमृता सिंह के अवतरण की तारीख २२ मार्च एवं जन्म स्थान-इंदौर (मध्यप्रदेश) है। शिक्षा-बी.कॉम. सहित अंग्रेजी में स्नात्तकोत्तर,बी.एड. किया है। इनकी रुचि-सामाजिक कार्य,पर्यटन और कार्यक्रम प्रबन्धन में है। वर्तमान में आपका निवास इंदौर में ही है। संप्रति से आप इंदौर में निजी विद्यालय में शिक्षक हैं।

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