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माँ की ममता

विजय कुमार
मणिकपुर(बिहार)

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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………


माँ की ममता है अनमोल
ना लगाओ इसका मोल,
ऐसी तराजू ना मिलेगी
जिसका लगा सके तू मोल।

माँ की ममता है अनमोल,
ना लगाओ इसका मोलll

माँ सृष्टि का सागर है
सब गुण से आगर है,
माँ नव-नव ज्योत जलाती है
काँटे को फूल बनाती है।

माँ की ममता है अनमोल,
ना लगाओ इसका मोलll

सीने से हमें लगाती है
बीती बात भुलाती है,
बिछड़े को चमन पे लाती है
आँचल में हमें सुलाती है।

माँ की ममता है अनमोल,
ना लगाओ इसका मोलll

कितने कष्ट उठाती है
कभी नहीं घबराती है,
कितना प्यार वो करती है
सारी पीड़ा हरती है।

माँ की ममता है अनमोल,
ना लगाओ इसका मोलll

परिचय-विजय कुमार का बसेरा बिहार के ग्राम-मणिकपुर जिला-दरभंगा में है।जन्म तारीख २ फरवरी १९८९ एवं जन्म स्थान- मणिकपुर है। स्नातकोत्तर (इतिहास)तक शिक्षित हैं। इनका कार्यक्षेत्र अध्यापन (शिक्षक)है। सामाजिक गतिविधि में समाजसेवा से जुड़े हैं। लेखन विधा-कविता एवं कहानी है। हिंदी,अंग्रेजी और मैथिली भाषा जानने वाले विजय कुमार की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक समस्याओं को उजागर करना एवं जागरूकता लाना है। इनके पसंदीदा लेखक-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ हैं। प्रेरणा पुंज-खुद की मजबूरी है। रूचि-पठन एवं पाठन में है।