कुल पृष्ठ दर्शन : 1

भविष्य और प्रेरणा माता- पिता ही

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ 
मनावर (मध्यप्रदेश)
********************************

हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)….

वर्तमान में कई वृद्ध परिजनों का तिरस्कार झेल रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह जैसे आधुनिकीकरण, कामकाजी लोगों का स्थानांतरण व युवाओ का शहरों की ओर पलायन आदि से बुजुर्गों की अनदेखी हो रही है, साथ ही अपने बड़ों के प्रति आदर-सम्मान छूटता जा रहा है।वृद्ध माता-पिता स्वास्थ्य ठीक ना होने से देखभाल हेतु उम्मीद करते हैं। यदि उनके प्रति अनदेखी करेंगे तो हमारे बच्चे भी उसी तरह अनुसरण करेंगे। ऐसे में माता-पिता  के मन में आ रहे युवाओं में इस तरह के बदलाव से भविष्य में उनके प्रति चिंतन प्रश्न उठने लगे हैं। युवाओं को चाहिए कि माता-पिता के लिए इलेक्ट्रॉनिक युग की भाग-दौड़ भरी दुनिया में से भी कुछ समय निकालें, साथ ही उनका तिरस्कार न करें l।उनका सम्मान करें, क्योकि उन्होंने ही परिवार शब्द एवं आशीर्वाद की उत्पत्ति की है। बुजुर्गो का आशीर्वाद ,सलाह सदैव  काम आती है, ये  उनके पास  अनुभव का ऐसा अनमोल खजाना होता है जिनको पीढ़ी दर पीढ़ी एक-दूसरे प्रेरणा स्वरूप  मिलता रहता है, क्योंकि हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा के स्त्रोत तो माता-पिता ही तो है।

परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्मे श्री वर्मा का स्थाई बसेरा मनावर जिला-धार (म.प्र.) है। भाषा ज्ञान हिंदी और अंग्रेजी का रखते हैं। आपकी शिक्षा हायर सेकंडरी और आयटीआय है। कार्यक्षेत्र-नौकरी ( मानचित्रकार के पद पर सरकारी सेवा) है। सामाजिक गतिविधि के तहत समाज की गतिविधियों में सक्रिय हैं। लेखन विधा-गीत, दोहा, हायकु, लघुकथा, कहानी, उपन्यास, पिरामिड, कविता, अतुकांत, लेख, पत्र लेखन आदि है। काव्य संग्रह-दरवाजे पर दस्तक, साँझा उपन्यास-खट्टे-मीठे रिश्ते (कनाडा), साझा कहानी संग्रह-सुनो, तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो और लगभग २०० साँझा काव्य संग्रह में आपकी रचनाएँ हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर ३८ साल से रचनाएँ छप रहीं हैं। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में देश-प्रदेश-विदेश (कनाडा) की विभिन्न संस्थाओं से करीब ५० सम्मान मिले हैं। ब्लॉग पर भी लिखने वाले संजय वर्मा की विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मातृभाषा हिन्दी के संग साहित्य को बढ़ावा देना है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद,तो प्रेरणा पुंज-कबीर दास हैं। विशेषज्ञता-पत्र लेखन में है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-देश में हिंदी को पूर्ण बढ़ावा मिले, बेरोजगारी की समस्या दूर हो, महंगाई भी कम हो, महिलाओं पर बलात्कार, उत्पीड़न, शोषण आदि पर अंकुश लगे और महिलाओं का सम्मान हो।