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मिटा दो कुरीति

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ 
उदयपुर(राजस्थान)

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जनता को भरमा रहे, करके नित पाखंड।
सदा अधर्मी को मिले, इन कर्मों का दंड॥
इन कर्मों का दंड, लूट का है यह धंधा।
कर छल बहुत प्रपंच, रखें भक्तों को अंधा॥
कह संजय देवेश, रहे क्यों अधर्म फलता।
सजग रहें प्रत्येक, सबक सिखला दे जनता॥

पोंगा-पंडित कर रहे, यह पाखंड अधर्म।
प्रभु का भी अब डर नहीं, नहीं स्वयं पर शर्म॥
नहीं स्वयं पर शर्म, धर्म की बातें कहते।
रावण से हैं काम, राम को जपते रहते॥
कह संजय देवेश, करें इनको हम दंडित।
श्रेष्ठ धर्म की हानि, करें ना पोंगा पंडित॥

देखो अब यह भक्ति भी, है कैसा व्यापार।
जोर चले पाखंड का, सत्य रहा है हार॥
सत्य रहा है हार, यही तो कलियुग आया।
करे भक्ति का ढोंग, यहाँ है सभी गँवाया॥
कह ‘संजय देवेश’, आज प्रण लेते हम सब।
दो यह मिटा कुरीति, नहीं चुप देखो मत अब॥

परिचय–संजय गुप्ता साहित्यिक दुनिया में उपनाम ‘देवेश’ से जाने जाते हैं। जन्म तारीख ३० जनवरी १९६३ और जन्म स्थान-उदयपुर(राजस्थान)है। वर्तमान में उदयपुर में ही स्थाई निवास है। अभियांत्रिकी में स्नातक श्री गुप्ता का कार्यक्षेत्र ताँबा संस्थान रहा (सेवानिवृत्त)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप समाज के कार्यों में हिस्सा लेने के साथ ही गैर शासकीय संगठन से भी जुड़े हैं। लेखन विधा-कविता,मुक्तक एवं कहानी है। देवेश की रचनाओं का प्रकाशन संस्थान की पत्रिका में हुआ है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जिंदगी के ५५ सालों के अनुभवों को लेखन के माध्यम से हिंदी भाषा में बौद्धिक लोगों हेतु प्रस्तुत करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-तुलसीदास,कालिदास,प्रेमचंद और गुलजार हैं। समसामयिक विषयों पर कविता से विश्लेषण में आपकी विशेषज्ञता है। ऐसे ही भाषा ज्ञानहिंदी तथा आंगल का है। इनकी रुचि-पठन एवं लेखन में है।

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