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मुझे मनाना जरा-जरा सा

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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तेरा मिलता प्यार जरा-सा,
खट्टा-मीठा कड़वा जरा-सा
भोर सुहानी जरा-जरा-सी,
इन्द्रधनुषी रंग जरा जरा-सा
तेरा मिलता भाव जरा-सा।

सुखद सुहाना सपना जरा-सा,
खिल जाती कलियाँ प्यारा-सी
होंठों पर है मुस्कान जरा-सी,
दिल भी नाचे जरा जरा-सा
तेरा मिलता प्यार जरा-सा।

तेरा मिलता उपहार जरा-सा,
चाहे मंहगा चाहे सस्ता-सा
तुमसे रूठना, तुमसे मानना,
मुझे मनाना जरा जरा-सा
मैं तुझे मनाऊँ जरा जरा-सा।

तुम ना बोलो जरा जरा-सा,
हम भी ना बोलें जरा जरा-सा
फिर सब भेद खोलें जरा जरा-सा।
आए मजा तब जरा जरा सा,
नाचे मन मोर जरा जरा-सा॥