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प्रिय प्रियतम पग धारिए

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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प्रिय प्रियतम पग धारिए,
प्रियवर प्रिये प्रवीन।
स्वागत शत् शत् आपका
भक्ति करूँ मैं दीन॥

सहज सरल मन भाव है,
सुंदर सरल स्वभाव।
सफल सत्य शुभ कामना,
मन में हो सद्भाव॥

चित्त चपल चंचल बहुत,
जैसे तरुवर पात।
करो कृपा करुणा निधे,
हम मानव की जात॥

धन्यवाद कहते रहो,
धरो सदा मन धीर।
मालिक ऊपर बैठ कर,
लिखता है तक़दीर॥

खोये-खोये से सदा,
क्यों इतने गंभीर।
बेचैनी छिपती नहीं,
तुम हो बहुत अधीर॥

स्वप्न सुनहरे देखिए,
मन सबकी जागीर।
बने बावले घूमते,
नहीं उचित यह पीर॥

आशा सब पूरी करें,
सदा करें उपकार।
ऐसा तो होता नहीं,
देख सकल संसार॥

अहित कभी मत सोचिए,
रखिए नेक विचार।
अपने प्रभु से देखिए,
जुड़ा हुआ है तार॥

गुरुवर देते सीख जो,
रखिए उसका ध्यान।
चलते-फिरते सीखिए,
गुरुवर देते ज्ञान॥