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मुस्कान है नारी

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’
इन्दौर मध्यप्रदेश)
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‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष…………………

नारी जीवन का संबल है,
और संबल ही नारी है।
नारी नहीं है शब्द का मुखडा़,
सब परिभाषा नारी है।
नारी शब्द में खुशबू भरी है,
चम्पा,चमेली,मोगरा की
नारी नहीं बस वह इस धरा की,
जीवन पालनहारी है।
नहीं कभी भी मुरझाई है,
नहीं कभी भी हारी है
वह बगिया की फुलवारी है,
इसीलिये तो नारी है।
नारी ममता की मूरत है,
त्याग की सीख पुरानी है
लक्ष्मी,दुर्गा की सोहबत में,
इसकी अजब रवानी है।
कल-कल गंगा-सी बहती है,
और हिमाला-सी लगती है
पर दिल में सबके बसती है,
और जीवन भी तरती है।
चाहें कितने सावन आएं,
और धरा,अम्बर महकाएं
जीवन की धड़कन बतियाए,
नारी सब पर भारी है।
कितनी फबती हैं मुस्कानें,
इस नारी के चेहरे पर
इन्द्रधनुष भी शरमा जाता,
नारी के मुस्काने पर ।
मन को चोंटिल ना कर दें हम,
और ना तन को घायल भी
भर दें मुस्कानें हम उसमें,
नारी का नव-श्रंगार करें।
नारी,नारी,नारी,नारी,
बस उसका सम्मान करें।
जितना भी हो पाये हमसे,
बस उसमें मुस्कान भरें।
नारी जीवन का संबल है,
और संबल ही नारी है..॥

परिचय-कार्तिकेय त्रिपाठी का उपनाम ‘राम’ है। जन्म ११ नवम्बर १९६५ का है। कार्तिकेय त्रिपाठी इंदौर(म.प्र.) स्थित गांधीनगर में बसे हुए हैं। पेशे से शासकीय विद्यालय में शिक्षक पद पर कार्यरत श्री त्रिपाठी की शिक्षा एम.काम. व बी.एड. है। आपके लेखन की यात्रा १९९० से ‘पत्र सम्पादक के नाम’ से शुरु हुई और अनवरत जारी है। आप कई पत्र-पत्रिकाओं में काव्य लेखन,खेल लेख,व्यंग्य और फिल्म सहित लघुकथा लिखते रहे हैं। लगभग २०० पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। आकाशवाणी पर भी आपकी कविताओं का प्रसारण हो चुका है,तो काव्यसंग्रह-‘ मुस्कानों के रंग’ एवं २ साझा काव्यसंग्रह-काव्य रंग(२०१८) आदि भी प्रकाशित हुए हैं। काव्य गोष्ठियों में सहभागिता करते रहने वाले राम को एक संस्था द्वारा इनकी रचना-‘रामभरोसे और तोप का लाईसेंस’ पर सर्वाधिक लोकप्रिय कविता का पुरस्कार दिया गया है। साथ ही २०१८ में कई रचनाओं पर काव्य संदेश सम्मान सहित अन्य पुरस्कार-सम्मान भी मिले हैं। इनकी लेखनी का उदेश्य सतत साहित्य साधना, मां भारती और मातृभाषा हिंदी की सेवा करना है।