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मुस्कुराने के लिए भी

नरेंद्र श्रीवास्तव
गाडरवारा( मध्यप्रदेश)
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बच्चे खेल रहे थे
क्रिकेट
अच्छे मूड में,
और
तभी पड़ोसी आकर
छीन ले गया गेंद।

पड़ोसिनें
तैयार हुईं थीं,
जाने के लिये मंदिर
अच्छे मूड में,
और
तभी एक पड़ोसिन का पति
ले गया
उसकी पत्नी को गुस्से में।

रविवार को
वह देख रहा था टी.वी.
अच्छे मूड में,
और
तभी बॉस का आ गया फोन,
बुला रहे थे ऑफिस।

दादाजी
निकालकर लाये थे पेंशन
अच्छे मूड में,
और
तभी उनका एक मित्र
आया उदास,
माँग रहा था रुपये उधार।

कितनी मजबूर है जिन्दगी,
मुस्कराने के लिये भी॥