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मेरा रखवाला

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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हे कृष्ण, हृदय बहुत है विचलित,
कैसे तुझे बताऊॅ॑, मन है संकुचित
एक ओर समाज का मुझपे पहरा,
मुझको गमों ने चारों ओर है घेरा।

कृष्ण, चुपके-चुपके मैं लिखी पाती,
भय से काँप रही है हमारी छाती
हे कृष्ण, खत पढ़ के तुम आ जाना,
विचलित मन का आग, बुझा जाना।

मेरे गमों के सहारे, कृष्ण आ जाना,
मेरे कृष्ण, ‘देवन्ती’ को गले लगाना
मेरे गम के सहारे, कृष्णा आ जाना,
हृदय में बुझा प्रेम दीप, जला देना।

हे कृष्णा हम तो तुम्हारे आश्रित हैं,
ये खत आँसू कजरे के, मिश्रित है।
सदा सुना है, तुम हो प्रेम का प्याला,
हे कृष्ण बनना मेरा रखवाला॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है

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