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मैं नील गगन का वासी

देवेन्द्र कुमार राय
भोजपुर (बिहार) 
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मैं नील गगन का वासी,
मैं सदा अभय हूँ
बिन बाधा निर्भय हूँ,
नहीं चाहिए कृपा किसी की
नहीं दया का भाव,
गुलामी से अच्छा है
रहे सदा अभाव,
नहीं बनना है मुझे
किसी का दास या दासी।
मैं नील गगन का वासी।
अपने श्रम से नीड़ बनाता
तिनके भले दिवार,
जिस दिन पाऊँ कंचन बाधा
फिर जीना है बेकार,
कम ही खाता,ताजा खाता
स्वीकार नहीं है बासी।
मैं नील गगन का वासी।

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