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याद में रो लेता हूँ

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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सोने से पहले अपने अतीत में खो लेता हूँ,
मैं इंसान हूँ, माँ-बाप की याद में रो लेता हूँ।

जो लोग मुझे अक्सर पागल समझ बैठे हैं,
उनकी नाराजगी में अपना मुँह धो लेता हूँ।

जब भी याद आती है तन्हाई में अपनों की,
मैं रातों में अपनी यादों के साथ हो लेता हूँ।

ऊब गया हूँ लोगों की फरेबी अदाकारी से,
मैं खुद को रातों के अंधेरे में डुबो लेता हूँ।

यादों के झरोखों में जीना आसान नहीं है,
मैं दरख्तों के साए में आँखें भिगो लेता हूँ।

भगवान नहीं हूँ जो मेरा दिल नहीं पसीजे,
मैं भी अपने आपको ग़म में डुबो लेता हूँ।

हर किसी के जीवन में कष्ट जरूर आते हैं,
मैं अपने हृदय में मदद के बीज बो लेता हूँ॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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