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रिमझिम-रिमझिम सावन बरसे

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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पावन सावन-मन का आँगन…

रिमझिम-रिमझिम सावन बरसे,
पिया मिलन को जियरा तरसे
मैं तो बनी योगिन के जैसे,
छोड़ पिया गए जब घर से।
रिमझिम-रिमझिम सावन बरसे,
पिया मिलन को जियरा तरसे॥

करुँ निवेदन पिया अब आओ,
हमको मत इतना तरसाओ
बरसो तुम भी सावन में,
जैसे काला बदरा बरसे।
रिमझिम-रिमझिम सावन बरसे,
पिया मिलन को जियरा तरसे॥

सावन माह मन भावन लागे,
मन कजरी को गावन लागे
कहे ‘उमेश’ चपला जब तड़पे,
तन मोरा कांप जाए तब डर से।
रिमझिम-रिमझिम सावन बरसे,
पिया मिलन को जियरा तरसे॥

परिचय–उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।