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रौनक… हर दिन क्यों नहीं ?

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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आज गाँव में बड़ी रौनक हो रही है,
ऐसा लग रहा है कि प्रधान जी का दौरा है।

आज कस्बे में बड़ी साफ-सफाई दिख रही है,
ऐसा लगता है कि चेयरमैन का दौरा है।

आज शहर में बड़ी रौनक हो रही है,
ऐसा लग रहा है किसी विधायक या अफसर का दौरा है।

आज पूरा शहर बिजली से जगमगा रहा है,
ऐसा लग रहा है कि किसी मंत्री जी का दौरा है।

राजधानी दुल्हन-सी सजी-सँवरी दिख रही है,
ऐसा लग रहा है किसी विदेशी अतिथि का दौरा है।

सवाल तो केवल यह है कि रौनक हो या सफाई,
किसी के दौरे की मोहताज क्यों है ?

गाँव, कस्बा, शहर या राजधानी, हर दिन सुंदर क्यों नहीं ?,
जनता को दिखावा नहीं, वरन् व्यवस्था में सुधार की जरूरत है॥