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लोकतंत्र

सुशीला रोहिला
सोनीपत(हरियाणा)
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लोकतंत्र की ताकत,नेताओं की है पूजा,
यज्ञ हवन में आहुति डाले,
मंगलाचार तंत्र-मंत्र रट डालेl
साधुओं का लगा जमघट
भूखे पेट भजन ना हो गोपाला,
यह लो अपनी कंठी माला।

मंदिरों में मंजीरे बजते,जो कभी राम ना कहे,
वो राम है रटते,नैया कैसे पार लगेगी।
दिन-रात भटकते,तपती धूप में भी चलते,
जनता से है माँग,हमारा रखना तुम ध्यान।

वादों की लिस्ट है लम्बी,हम सब कुछ करें,
घूस हम तुम्हें दें,तुम हमें वोट डालो।
चेतावनी!
सुन लो बहनों-भाईयों वोट है अपना अधिकार,
घूस दे जो वोट ले,ना वे करें देश का कल्याण
पेट भरता अपना,जनता का न रखे ध्यान।
वोट दो उसको अपना जिसके जनता में प्राण।

सुरक्षित हो राष्ट्र हमारा,मोदी ही एक नारा,
सेना ने भी यह माना,आतंक का हो सफाया
सदगुरु देव का है कहना,मोदी ही फिर आना।
आओ नेक काम कर डालें,वोट अपना सब डालेंll

परिचय-सुशीला रोहिला का साहित्यिक उपनाम कवियित्री सुशीला रोहिला हैl इनकी जन्म तारीख ३ मार्च १९७० और जन्म स्थान चुलकाना ग्राम हैl वर्तमान में आपका निवास सोनीपत(हरियाणा)में है। यही स्थाई पता भी है। हरियाणा राज्य की श्रीमती रोहिला ने हिन्दी में स्नातकोत्तर सहित प्रभाकर हिन्दी,बी.ए., कम्प्यूटर कोर्स,हिन्दी-अंंग्रेजी टंकण की भी शिक्षा ली हैl कार्यक्षेत्र में आप निजी विद्यालय में अध्यापिका(हिन्दी)हैंl सामाजिक गतिविधि के तहत शिक्षा और समाज सुधार में योगदान करती हैंl आपकी लेखन विधा-कहानी तथा कविता हैl शिक्षा की बोली और स्वच्छता पर आपकी किताब की तैयारी चल रही हैl इधर कई पत्र-पत्रिका में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका हैl विशेष उपलब्धि-अच्छी साहित्यकार तथा शिक्षक की पहचान मिलना है। सुशीला रोहिला की लेखनी का उद्देश्य-शिक्षा, राजनीति, विश्व को आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार मुक्त करना है,साथ ही जनजागरण,नारी सम्मान,भ्रूण हत्या का निवारण,हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनाना और भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान प्रदान करना है। लेखन में प्रेरणा पुंज-हिन्दी है l आपकी विशेषज्ञता-हिन्दी लेखन एवं वाचन में हैl