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शब्द हकीकत में भाव रस, समझे बिना लेखन संभव नहीं

इंदौर (मप्र)।

शब्द हकीकत में औरत है इसे समझे बिना लेखन कर पाना संभव नहीं है। लेखन करने के लिए बहुत ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन परिदृश्य का सूक्ष्म विश्लेषण करने की जरूरत है।
प्रसिद्ध लेखक गौतम सिद्धार्थ ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर की पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में विद्यार्थियों से शनिवार को रूबरू होकर यह बात कही। कहानी से उपन्यास तक की लेखन की बारीकियों की आपने विद्यार्थियों को रोचक अंदाज में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, हर शब्द का अपना भाव है, हर शब्द का अपना रस है। लेखन की किसी भी विधा में शब्दों के भाव को ही पहचानना होता है। यदि लेखक भाव को नहीं समझता है तो, उसकी लेखनी प्रभावशाली नहीं हो सकती है। बच्चों के मनोभाव पर आधारित पुस्तक ‘अगर मगर किंतु लेकिन परंतु’ के लेखक श्री सिद्धार्थ ने लेखन की विविध विधाओं पर चर्चा में कहा कि किसी भी तरह के लेखन में हर शब्द का कुछ कहना जरूरी है। यदि ऐसा है तो आपका लिखा हुआ सार्थक होगा। यदि शब्द कुछ नहीं कह रहा है तो समझो कि लिखने में कमजोरी है।
कहानी लेखन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कहानी लेखन में लेखक एक ही समय में कई किरदार जीता है। लेखक को किरदार में प्रवेश करके लिखना होता है, ताकि वह जो भी लिखे वह प्रभावी रहे। जो किरदार को जीए बिना लिख देते हैं, वे लेखन के क्षेत्र में सफल नहीं हो पाते हैं। आपने बताया कि, साहित्यकार अमृत लाल नागर ने भगवान राम पर बहुत लिखा, लेकिन जब उन्हें भगवान कृष्ण पर लिखने के लिए कहा गया तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया था कि, वह कृष्ण जी के बारे में ज्यादा नहीं जानते। बाद में उन्होंने अपनी आँखों पर पट्टी बांधकर वृंदावन का भ्रमण किया और श्रीकृष्ण के साथ ही वहां के भाव का अनुभव किया। इसके बाद श्री नागर ने श्री कृष्ण पर ऐसा साहित्य लिखा कि, वह अमर हो गया ।

प्रारंभ में अतिथि का परिचय विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरगुंदे ने दिया। अतिथि का स्वागत डॉ. मनीष काले एवं हरीश गिदवानी ने किया।

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