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शांति निकेतन

डॉ. स्वयंभू शलभ
रक्सौल (बिहार)

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भाग-१…….

शांति निकेतन मेरे लिए हमेशा ही प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। इस बार इस यात्रा ने एक लेखक के रूप में मुझे प्रकृति के ऐसे रूप का साक्षात्कार कराया जो आगे भी अनगिनत रचनाओं को जन्म देगा…l गुस्करा (वर्धमान) में एक दिन प्रवास के बाद अगले दिन ५ अक्टूबर की सुबह हम शांति निकेतन के लिए रवाना हुए। सड़क मार्ग से वहां की दूरी केवल २५ किमी है। बीरभूम जिले में स्थित निकेतन का निकटतम शहर बोलपुर है,जो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से लगभग १५० किमी की दूरी पर है। यहाँ १८६३ में रवींद्रनाथ के पिता महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने ७ एकड़ लाल मिट्टी वाली बंजर भूमि को लेकर उसे एक हरे भरे उपवन के रूप में विकसित किया। यहीं एक आश्रम बनाया,जिसका नाम रखा ‘शांति निकेतन।आगे पुत्र रवींद्रनाथ ने उस भूमि को अपनी परिकल्पना के अनुरूप सजाया- संवारा...उसे अपनी साधना स्थली बनाया और वहीं 'विश्वभारती विश्वविद्यालय' की स्थापना कर एक धरोहर दुनिया को सौंप दीl कवि गुरु टैगोर ने यहाँ कई कालजयी साहित्यिक कृतियों का सृजन भी किया। वकालत की पढ़ाई अधूरी छोड़कर विलायत से लौटे रवीन्द्रनाथ ने यहाँ विश्वभारती की स्थापना के साथ छोटे बच्चों के लिए विद्यालय भी खोला,जिसे पत्नी मृणालिनी देवी चलाती थीं। उन्होंने अपने आभूषण बेच कर धन को रवींद्रनाथ के इस जीवन लक्ष्य में लगा दिया था। रवींद्रनाथ नेनोबेल` पुरस्कार से प्राप्त राशि को भी इसी संस्था के उत्थान में लगाया। यहाँ छात्रों को उनकी रुचि के अनुरूप विषय चुनने का अवसर दिया जाता है। उनकी प्रतिभा को पल्लवित और पुष्पित होने का समुचित अवसर मिलता है। यहाँ प्राचीन गुरु शिष्य परम्परा के अनुरूप हरे-भरे वृक्षों की छाँव में अध्ययन-अध्यापन का कार्य होता है। टैगोर बच्चों के स्वाभाविक विकास पर जोर देते थे। वे वैसी शिक्षा के विरोधी थे,जो विद्यार्थी को शुरू से ही किताबी कीड़ा बना दे। उनके विचार से पुस्तकीय ज्ञान के अलावा और भी कई रास्ते हैं ज्ञान की खोज के। टैगोर ने शिक्षा को कांक्रीट के पिंजरों से निकालकर उसे प्रकृति,कला और लोक जीवन से जोड़ा। टैगोर ने अपनी कविताएं भी इन्हीं हरे-भरे पेड़ों के नीचे पक्षियों के गान के साथ लिखी हैं। वे अपनी कविताओं में प्राकृतिक सौंदर्य और पक्षियों के गान का आभास लेकर आते थे। रवीन्द्र संगीत भी यहीं रचा गया था,जो बंगाल में आज भी काफी लोकप्रिय है। सर्वधर्म समभाव के सिद्धांत पर बनाये गए शांति निकेतन में एक तरफ चर्च,एक तरफ मस्जिद,एक तरफ मंदिर और एक तरफ बुद्ध का प्रतीक चिह्न बनाया गया है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, शिवानी,सत्यजित राय,इंदिरा गांधी,अमर्त्य सेन समेत देश-विदेश के अनगिनत कला साहित्य प्रेमी शान्ति निकेतन से जुड़े रहे हैं। टैगोर हाउस,अमर कुटीर,छातिमतला,कला भवन,रवींद्र भारती संग्रहालय, उत्तरायण संकुल,श्री निकेतन,श्रीजनी शिल्पा ग्राम,चीना भवन, निप्पोन भवन,विश्वभारती विश्वविद्यालय आदि शांति निकेतन के अभिन्न अंग हैं,जो सालोंभर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने रहते हैं…l