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संतोष कहाँ ?

एस.अनंतकृष्णन
चेन्नई (तमिलनाडु)
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मानव जीवन में संतोष,
मानवीय मूल्यांकन नहीं,
ईश्वरीय देन मान!
करोड़पति सदा बीमार,
संतोष कहाँ ?

इन्स्पेक्टर के पिता या बेटा
अपराधी,
संतोष कहाँ ?
डाकू सार्वजनिक माफ माँग,
सांसद बना ,
पर जनता में संतोष कहाँ ?

प्रधानमंत्री का बेटा,
अल्पायु में जीवन मुक्ति
जीवन में संतोष कहाँ ?
बड़ा तपस्वी, ईश्वर का भक्त,
पर पड़ोस का भ्रष्टाचारी
बाह्य आडम्बर का आलीशान महल,
संतोष कहाँ ?

कबीर का दोहा-
‘रूखा सूखा खाइकै,
ठंडा पानी पीव,
देखे ब्रादरी चोपडी मत ललचाओ जीव’
संतोष पियक्कड़ को पीने में,
कामुक को अश्लील बातें करने में
चोर को चोरी करने में,
अंधे को आँखें मिलने में
वीरों को देश की सुरक्षा में,
प्राण गँवाने में
ठेकेदारों को कच्ची सड़कें बनाकर,
पैसे हडपने में।
संतोष ईश्वरीय देन,
सबकी मचावत राम गोसाई॥

परिचय –एस.अनंतकृष्णन तमिलभाषी होकर भी तमिलनाडु में हिंदी प्रचारक हैं। आपकी शैक्षणिक योग्यता एम.ए. (हिंदी) और एम.एड. है। अवकाश प्राप्त प्रधान अध्यापक होकर आप चेन्नै में हिंदी प्रचारक, शिक्षा महाविद्यालय में प्राध्यापक सहित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (चेन्नै) से भी जुड़े रहे हैं। स्वतंत्र लेखक के रूप में आप सामाजिक मीडिया माध्यमों में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएँ कई पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हैं। आपको हिंदी साहित्य संस्थान (लखनऊ) से सौहार्द सम्मान २०२१, कबीर कोहिनर सम्मान, जिला शिक्षा अधिकारी, तमिलनाडु हिंदी अकादमी, हिंदी साहित्य अकादमी (मुम्बई), साहित्य भूषण, साहित्य भास्कर और श्रेष्ठ रचनाकार सहित ५० से अधिक सम्मान मिल चुके हैं। आप राज्य की जनता को राष्ट्रहित के लिए हिंदी सिखाते हैं।

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