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संयुक्त परिवार-प्रेम का सागर

दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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एक छत एक आँगन,
एकसाथ दिलों की धड़कन
विश्वास की नींव, प्रेम का सागर,
मुस्कुराता है जहां अपनापन।

रिश्ते जहां मीठी धुन से,
सदा खुले खुशियों के द्वार
सुंदर बगिया-सा महकता,
सजता है संयुक्त परिवार।

दादा-दादी का आशीष,
माता-पिता की सच्ची सीख
चाचा-चाची का निष्छल स्नेह,
संयुक्त परिवार का हैं ये आधार।

रिश्तों की डोरी मजबूत,
एकता में शक्ति जहां साकार
शिक्षा संस्कारों की जीवंत पाठशाला,
खुशियाँ बिखेरता संयुक्त परिवार।

जहां ‘मैं’ नहीं, ‘हम’ का भाव हो,
समर्पण की चलती बयार।
संयुक्त परिवार सदा ही होते,
ईश्वर का अनुपम उपहार॥