भोपाल (मप्र)।
मशहूर शायर और ग़ज़लकार डॉ. बशीर बद्र का गुरुवार की दोपहर को भोपाल में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य और शायरी जगत में शोक की लहर है।
जानकारी के अनुसार ९१ साल के डॉ. बद्र लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी। उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली। परिजनों ने उनको सुपुर्द-ए-खाक किया।
अनेक स्थानीय संस्थाओं सहित साहित्य, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय संस्था डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन ने भी उर्दू के मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन पर गहरा दुख जताया है। संस्था के पदाधिकारियों ने शोक संदेश में इसे उर्दू साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया। संस्था के संरक्षक और विश्व प्रसिद्ध शायर प्रो.वसीम बरेलवी ने कहा कि बशीर बद्र सिर्फ एक शायर नहीं थे, बल्कि वे उर्दू भाषा की तहजीब, मोहब्बत और इंसानी रिश्तों की नरमी के प्रतीक थे। उनकी शायरी ने टूटे दिलों को हिम्मत दी, बिखरते रिश्तों को आवाज दी और मुश्किल समय में भी उम्मीद कायम रखी।