पुस्तक चर्चा…
इंदौर (मप्र)।
अश्विनी कुमार दुबे की कहानियों में पात्र सहज रूप से आते हैं। लेखक के पात्र कहानी में केवल अपनी भूमिका निभाने के लिए उपस्थित नहीं होते, बल्कि वे कथा-परिस्थितियों से स्वाभाविक रूप से जन्म लेते हुए दिखाई देते हैं। यही सहजता उनकी कहानियों को विश्वसनीय बनाती है। उनके पात्रों में जीवन की वास्तविकता दिखाई देती है और पाठक उनसे सहज रूप से जुड़ने लगता है।
क्षितिज साहित्य संस्था द्वारा नगर के ख्यात कथाकार अश्विनी कुमार दुबे के नवीन कहानी-संग्रह ‘अपराजिता’ पर अंगारा होटल के सभागार में सार्थक पुस्तक चर्चा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार महेश दुबे ने यह बात कही। रचनाकारों, साहित्यप्रेमियों और वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति में इस कार्यक्रम में ‘अपराजिता’ की कहानियों के कथ्य, शिल्प, पात्रों और उनकी अंतर्ध्वनियों पर गंभीरता से विमर्श किया गया।
पुस्तक पर कथाकार प्रकाश कान्त और साहित्यकार अंतरा करवड़े ने सार्थक चर्चा की। दोनों वक्ताओं ने संग्रह की कहानियों को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखते हुए उनके कथ्य और शिल्प की विशेषताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ‘अपराजिता’ की कहानियाँ केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करतीं, बल्कि उनके भीतर जीवन के अनेक स्तर, मानवीय संबंधों की जटिलताएँ और समय के बदलते हुए यथार्थ की आहट भी सुनाई देती है।
तीनों वक्ताओं से चर्चा में यह बात विशेष रूप से सामने आई कि अच्छी कहानी केवल कथानक से प्रभाव नहीं छोड़ती, बल्कि पात्रों, वातावरण और मानवीय संवेदना के माध्यम से पाठक के भीतर एक प्रश्न, एक अनुभूति छोड़ जाती है। ‘अपराजिता’ की कहानियों में यह विशेषता दिखाई देती है।
कार्यक्रम का सधा हुआ संचालन साहित्यकार नंदकिशोर बर्वे ने किया। दीपक गिरकर ने आभार प्रदर्शन किया।