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सामाजिक दूरी, जरूरी

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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यह तो सर्वविदित प्रमाण है,
इस भीड़-भाड़ ने खूब ली अमूल्य जान है।
‘कोरोना’ के भीषण काल को,पापहम-सब याद करें
भूलने का कभी नहीं ख्याल करें।
यह एक सीख के समान होगी,
समझने-समझाने की बात होगी।
लाखों मौतें हम-सबने देखी है यहां,
नहीं हम भूल सकते हैं वह मंजर यहां।
यह एक वैश्विक उबाल था,
दुनिया का सबसे काला काल था।
लाखों अपने लोग हमने यहां खो दिए,
जहन्नुम से भी ज्यादा दुर्दशा हुई यहां।
घर-घर में दिखता था मौतों का मंजर,
श्मशान घाट में दिखता था बवंडर जहां।
यह था एक पल जब लोगों ने बनाई थी दूरी,
अपने भी बन गए थे पराए,बना ली थी दूरी।
उत्तम उपचार ने दिया एक मजबूत नियंत्रण,
हम-सब मिलकर नहीं दें फिर से इसे आमंत्रण।
‘सामाजिक दूरी’ का मजबूत प्रयास हो,
जीवन बचाने का एक अपूर्व अहसास हो।
महामारी न गई है और न जाने वाली है,
हम-सबको अपनी-अपनी करनी रखवाली है।
ज़िन्दगी में ज़िन्दगी के लिए यह बहुत जरूरी है,
सामाजिक दूरी हम-सबकी बन गई एक मजबूरी है॥

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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