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साहित्य की मुस्कान

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’
इंदौर (मध्यप्रदेश )
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डाॅ. विकास दवे (निदेशक साहित्य अकादमी मप्र) जन्मदिन विशेष..

३० मई १९६९ को आलोट मध्यप्रदेश में,
विकास दवे नाम का तारा धरती पर उतरा
विकास की आभा से म.प्र. साहित्य जगत,
प्रगति के पथ पर बढ़कर, निरंतर निखरा।

स्वर्गीय जीवनलाल दवे जी इनके पिता,
और श्रीमती सुशीला दवे है श्रद्धेया माता
जीवन राहों में जीवनसाथी श्रीमती सुनीता,
होनहार पुत्र हार्दिक व विदुषी पुत्री हर्षिता।

बाल्यावस्था से वे साहित्य में मन को रमाते,
मध्यमवर्गीय जीवन से वह नहीं हार मानते
जो ठान लिया वह विकास करकर दिखाते,
कुशाग्र बुद्धि, सादगी, उच्च विचार सिखाते।

स्वयं को, बहुत बड़ी-सी बाल पत्रिका का,
एक बहुत छोटा सा सम्पादक वह है कहते
राष्ट्र प्रगति का ध्येय, वह हृदय स्पंदन-सा,
आठों याम, सुबह-शाम धारणकर रखते।

अपने सुव्यवहार से छोटे-बडे़, हमउम्र में,
सदैव विशेष रूप से वह पहचाने जाते
बडे़-बडे़ काम अनवरत वह करते रहते,
परिश्रम के बल से नव पद प्रतिष्ठा पाते।

वह संघर्षों में डटे रहते मनोबल के सहारे,
अनेक सम्मान प्राप्त किए प्रतिभा सहारे
हिंदुस्तान को नवजागृति के लिए पुकारे,
विषम परिस्थितियों से भी कभी नहीं हारे।

वह नवांकुरों को प्रोत्साहन देकर बढ़ाते,
सबको ही समानता, आदर देकर हर्षाते
साहित्य क्षेत्र में वह सदैव नवाचार चाहते,
राष्ट्रप्रेम की अविरल धारा को वह बहाते।

बिखेरते साहित्य जग में मधुरिम मुस्कान,
माँ भारती के सेवक, बढ़ाते राष्ट्र का मान।
निरंतर साहित्य सेवा, ध्येय सतत उत्थान,
डाॅ. विकास दवे साहित्य निदेशक महान॥

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