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सीमाएँ जब टूटती हैं…

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार
अहमदाबाद (गुजरात ) 
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सीमाएँ जब टूटती हैं,
बनी हुई मूरत को
जब हथौड़े से तोड़ा जाता है,
सदियों पुरानी मूरत
पहले झेलेगी छोटे-छोटे वार,
असंख्य प्रहारों के पश्चात
एक आखिरी वार
जो होगा सबसे ताकतवर,
बिखर जाएगी मिट्टी।

जब बिखर जाती है कोई बनी हुई मूरत,
अब नयी मूरत बनने में
कितना वक़्त लगेगा,
अब फिर से
बन भी पायेंगी या नहीं!
ये कौन जानता है
और क्यों बने फिर से!
वही की वही पुरानी खोह में
क्यों बसे!
रूढ़ और निंदनीय दीवारों से
निकल,
परत दर परत
घाव से हटती चली गई,
नहीं बच पा रही थी साँस तक
ज़हर ही जहर हो रहा आप्लावित।

टूटा खण्ड,
स्तूप को भी नहीं हुई खबर
सोख लिया रसातल में अश्रु
लांघ चला क्रौध पीड़ा अनुगामी,
बढ़ रहा
नेस्तनाबूत करने हर जख्म की पीड़ा
सीमा ताक रही अवाक,
दिशाओं में बज उठी रणभूमि
हाहाकार के बीच शंखनाद,
बढ चला कोलाहल होने एकटक
दृष्टि स्पष्ट नहीं संदेह हृदय
पाने स्वयं को चला पथिक अजनबी,
अंधेरा छा गया जगत में
भीतर प्रज्वलित मन कदम-कदम
जलती जा रही है ज्योति
कट-कट गिर रहा अंधेरा।
हाँ,मैंने अब जाना
सीमाएँ जब टूटती हैं,
तब होता प्रकाश तम में॥

परिचयडाॅ.आशासिंह सिकरवार का निवास गुजरात राज्य के अहमदाबाद में है। जन्म १ मई १९७६ को अहमदाबाद में हुआ है। जालौन (उत्तर-प्रदेश)की मूल निवासी डॉ. सिकरवार की शिक्षा- एम.ए.,एम. फिल.(हिन्दी साहित्य)एवं पी.एच.-डी. 
है। आलोचनात्मक पुस्तकें-समकालीन कविता के परिप्रेक्ष्य में चंद्रकांत देवताले की कविताएँ,उदयप्रकाश की कविता और बारिश में भीगते बच्चे एवं आग कुछ नहीं बोलती (सभी २०१७) प्रकाशित हैं। आपको हिन्दी, गुजराती एवं अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। आपकी कलम से गुजरात के वरिष्ठ साहित्यकार रघुवीर चौधरी के उपन्यास ‘विजय बाहुबली’ का हिन्दी अनुवाद शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। प्रेरणापुंज-बाबा रामदरश मिश्र, गुरूदेव रघुवीर चौधरी,गुरूदेव श्रीराम त्रिपाठी,गुरूमाता रंजना अरगड़े तथा गुरूदेव भगवानदास जैन हैं। आशा जी की लेखनी का उद्देश्य-समकालीन काव्य जगत में अपना योगदान एवं साहित्य को समृद्ध करने हेतु बहुमुखी लेखनी द्वारा समाज को सुन्दर एवं सुखमय बनाकर कमजोर वर्ग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और मूल संवेदना को अभिव्यक्त करना है। लेखन विधा-कविता,कहानी,ग़ज़ल,समीक्षा लेख, शोध-पत्र है। आपकी रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित और आकाशवाणी से भी प्रसारित हैं। काव्य संकलन में आपके नाम-झरना निर्झर देवसुधा,गंगोत्री,मन की आवाज, गंगाजल,कवलनयन,कुंदनकलश,
अनुसंधान,शुभप्रभात,कलमधारा,प्रथम कावेरी इत्यादि हैं। सम्मान एवं पुरस्कार में आपको-भारतीय राष्ट्र रत्न गौरव पुरस्कार(पुणे),किशोरकावरा पुरस्कार (अहमदाबाद),अम्बाशंकर नागर पुरस्कार(अहमदाबाद),महादेवी वर्मा सम्मान(उत्तराखंड)और देवसुधा रत्न अलंकरण (उत्तराखंड)सहित देशभर से अनेक सम्मान मिले हैं। पसंदीदा लेख़क-अनामिका जी, कात्यायनी जी,कृष्णा सोबती,चित्रा मुदगल,मृदुला गर्ग,उदय प्रकाश, चंद्रकांत देवताले और रामदरश मिश्र आदि हैं। आपकी सम्प्रति-स्वतंत्र लेखन है।