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होली का रंग

संजय जैन ‘बीना’
मुंबई(महाराष्ट्र)
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रंग और हम(होली स्पर्धा विशेष )…

तुम्हें कैसे रंग लगाएं,
और कैसे होली मनाएं ?
दिल कहता है होली,
एक-दूजे के दिलों में खेलो
क्योंकि बाहर का रंग तो
पानी से धुल जाता है,
पर दिल का रंग दिल पर
सदा के लिए चढ़ा जाता है।

प्रेम-मोहब्बत से भरा,
ये रंगों का त्यौहार है
जिसमें राधा कृष्ण का,
स्नेह-प्यार बेशुमार है
जिन्होंने स्नेह-प्यार की,
अनोखी मिसाल दी है
और रंग लगा कर,
दिलों की कड़वाहट मिटाते हैं।

होली आपसी भाईचारे,
और प्रेमभाव को दर्शाती है
और सात रंग की फुहार से,
सात फेरों का रिश्ता निभाती है
साथ ही ऊँच-नीच का,
भेदभाव मिटाती है।
और लोगों के हृदय में,
भाईचारे का रंग चढ़ाती है॥

परिचय– संजय जैन बीना (जिला सागर, मध्यप्रदेश) के रहने वाले हैं। वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। आपकी जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६५ और जन्मस्थल भी बीना ही है। करीब २५ साल से बम्बई में निजी संस्थान में व्यवसायिक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। आपकी शिक्षा वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ ही निर्यात प्रबंधन की भी शैक्षणिक योग्यता है। संजय जैन को बचपन से ही लिखना-पढ़ने का बहुत शौक था,इसलिए लेखन में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अपनी लेखनी का कमाल कई मंचों पर भी दिखाने के करण कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इनको सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के एक प्रसिद्ध अखबार में ब्लॉग भी लिखते हैं। लिखने के शौक के कारण आप सामाजिक गतिविधियों और संस्थाओं में भी हमेशा सक्रिय हैं। लिखने का उद्देश्य मन का शौक और हिंदी को प्रचारित करना है।