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अनमोल राखी

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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रिश्तों का रक्षा-बंधन   (रक्षाबंधन विशेष)…

जग के सारे रिश्ते अनमोल,
हर अनमोल रिश्ते से भी अनमोल रिश्ता
भाई-बहन का प्यारा रिश्ता।

दो दिन का यह जग का मेला,
सब झूठा मान-अभिमान मन में पाले
भाई-सा अनमोल कोई न, बहन का प्यार जगत में।

झूठी-मूठी धन-दौलत, महल-अटारी,
कुछ भी ना लाती बहन, फिर भी दौड़ी आती है
एक धागा कच्चा बाँधे, ढेरों आशीष देती है।

दोनों के जीवन में सुख-दु:ख,
धूप-छाँव भी आते हैं
हर परिस्थिति में भी सदा मुस्कुराती बहन प्यारी।

थाल लिए हाथ, रोली, चंदन, अक्षत, दीपक,
जाने कितना प्यार साथ में लाती
जग में सारे रिश्ते सच्चे,
भाई-बहन का प्यारा रिश्ता अनमोल।

हाथ में राखी, सिर पर चंदन, रोरी अक्षत, दीपक,
प्यार अपना ढेर देती।
बहन सदा बस यही है कहती-
“भाई हमारे, सदा खुश रहना॥”