वर्धा (महाराष्ट्र)।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने साहित्य के माध्यम से लोगों को आत्महीनता की ग्रन्थि से निकालने का काम किया। विश्वबोध का रास्ता देशबोध से होकर निकलता है। हमें भारत के स्वत्व की रक्षा करनी चाहिए।
यह बात महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती के अवसर पर हिंदी साहित्य विभाग की ओर से ‘साहित्य के स्वरूप की स्वतंत्र सत्ता और आचार्य रामचंद्र शुक्ल’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष तथा दीनदयाल उपाध्याय (गोरखपुर) विवि के हिंदी विभाग के अवकाश प्राप्त अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कही। विवि के महादेवी वर्मा सभागार में सोमवार को इस व्याख्यान में हिंदी साहित्य विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रीति सागर ने स्वागत एवं प्रस्तावित वक्तव्य दिया।
प्रो. गुप्त का स्वागत प्रो. प्रीति व सागर ने किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी साहित्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूपेश व कुमार सिंह ने किया। सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने आभार ज्ञापित किया।