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माता-पिता सबसे महान

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’
सोलन (हिमाचल प्रदेश)
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हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)….

माता-पिता से ही,
हमारी पहिचान है
माता-पिता भगवान,
से भी महान हैं।

माता-पिता ही हमारा,
भविष्य बनाते हैं
खुद भूखे रह कर भी,
हमें खिलाते हैं।

माता-पिता भगवान के,
प्रतिनिधि बनकर आते हैं
और हमारा जीवन,
अच्छे से सवांरते हैं।

माता-पिता का अहसान,
हम कभी नहीं चुका पाएँगे
एक जन्म क्या उसके लिए 
सौ जन्म भी कम पड़ जाएँगे।

माता-पिता हमारे,
भविष्य निर्माता हैं
बच्चों के असली,
भाग्य विधाता हैं।

खुद की खुशियों का बलिदान कर,
बच्चों का भविष्य बनाते हैं
अपनी इच्छाओं को त्याग कर,
बच्चों की प्राथमिकता बनाते हैं।

जो भी अपने माँ-बाप,
को दुखी रखता है
वो स्वयं भी कभी,
सुखी नहीं रहता है।

माता-पिता से लें हम,
ज़िन्दगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा
न रखें कोई उनके प्रति,
मन में कोई गलत धारणा।

हमेशा करते रहें,
माता-पिता का सम्मान।
उनको मानें हमेशा,
भगवान से महान॥

परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ नाम है। १५ जून १९६२ को कटनी (म.प्र.)में अवतरित हुए डॉ. मोहन का वर्तमान में जिला सोलन स्थित चक्का रोड, बद्दी (हि.प्र.)में बसेरा है। आपका स्थाई पता स्थाई पता हिमाचल प्रदेश ही है। सिंधी,हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले डॉ. मोहन ने बीएससी सहित आर.एम.पी.,एन. डी.,बी.ई.एम.एस., एम.ए., एल.एल.बी.,सी. एच.आर.,सी.ए.एफ.ई. तथा एम.पी.ए. की शिक्षा भी प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र में दवा व्यवसायी ‘भारतीय’ सामाजिक गतिविधि में सिंधी भाषा-आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रचार करने सहित थैलेसीमिया बीमारी के प्रति समाज में जागृति फैलाते हैं। इनकी लेखन विधा-क्षणिका, व्यंग्य लेख एवं ग़ज़ल है। कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। ‘उजाले की ओर’ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित है। आपको राजस्थान से ‘काव्य कलपज्ञ’,उ.प्र. द्वारा ‘हिन्दी भूषण श्री’ की उपाधि एवं हि.प्र. से ‘सुमेधा श्री २०१९’ सम्मान दिया गया है। विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अध्यक्ष (सिंधुडी संस्था)होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-साहित्य का सृजन करना है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद एवं प्रेरणापुंज-प्रो. सत्यनारायण अग्रवाल हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले,हमें ऐसा प्रयास करना चाहिए। नई पीढ़ी को हम हिंदी भाषा का ज्ञान दें, ताकि हिंदी भाषा का समुचित विकास हो सके |