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‘कवि के मन से’ काव्य संग्रह का हुआ लोकार्पण

दिल्ली।

साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सभागार में ३० अप्रैल को विख्यात कवि डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह ‘कवि के मन से’ का लोकार्पण किया गया। अध्यक्षता साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती ममता कालिया ने की। आयोजन में श्रोतागण को देश के मूर्धन्य रचनाकारों बालस्वरूप राही, प्रताप सहगल, डॉ. ओम निश्चल, डॉ. संजीव कुमार एवं डॉ. रहमान मुसव्विर का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
    वरिष्ठ साहित्यकार श्री सहगल ने छंदमुक्त एवं छंदबद्ध कविता के मध्य उपजे भेद के प्रति चिंता जाहिर की। डॉ. कुमार ने कहा कि इस संग्रह की कविताएँ दूर-दूर तक पहुँचे तो समाज का हित होगा। शीर्षस्थ गीतकार श्री राही ने कहा कि आज की गोष्ठी को देखकर यह विश्वास पुष्ट हुआ है कि कविता के पाठक आदि के कम होने की बात महज अफवाह ही है। श्री राही ने डॉ. वाजपेयी की ग़ज़ल ‘टूटते लोगों को उम्मीदें नई देते हुए…’ का पाठ भी किया। श्रीमती कालिया ने परिहास के रूप में जब लोकार्पण कार्यक्रम को ‘बंपर कार्यक्रम’ और डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी जी को कविता का ‘अमिताभ बच्चन’ कहकर संबोधित किया तो पूरा सभागार हँसी-खुशी और तालियों की गूंज में सराबोर हो गया।
  श्रीमती इंदु निगम, नरेश शांडिल्य, श्रीमती रेणु हुसैन और डॉ. विभा नायक ने भी श्री वाजपेयी की कविताओं का पाठ किया।
   सुप्रसिद्ध शायर डॉ. रहमान मुसव्विर ने प्रभावी संचालन किया। धन्यवाद श्रीमती ममता किरण एवं डॉ. वाजपेयी ने व्यक्त किया।