सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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यहाँ-वहाँ सब घूम रहे हैं
रूप बदल कर ये फिरते,
नहीं तनिक भी लाज-शर्म,
काम घिनौने ये करते।
कहीं कबाड़ी ,कहीं ड्राइवर
कहीं नौकरी ये करते,
भेद सभी का मिलने पर
बड़ी योजना ये रचते।
इन्हें पकड़ना बहुत ज़रूरी
दहशत ये फैला जाते,
सीधे-साधे इंसानों को
ख़ूनी ये बतला जाते।
सीख उन्हें कुछ ऐसी देनी,
अब हिम्मत नहीं कर पाएँ।
देश की रक्षा बड़ी ज़रूरी,
सब मिल देश बचा पाएँ॥