कुल पृष्ठ दर्शन :

पश्चिमी उप्र के विकास का नया द्वार ‘जेवर हवाई अड्डा’

डॉ. शैलेश शुक्ला
लखनऊ (उत्तरप्रदेश)
****************************************

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) अब उड़ान संचालन के लिए तैयार है। यह केवल एक नया हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि पश्चिमी उप्र और पूरे उत्तर भारत के आर्थिक, औद्योगिक एवं सामाजिक विकास की नई कहानी का प्रारंभ है। जिस प्रकार किसी क्षेत्र के विकास में सड़क, रेल और बिजली महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उसी प्रकार एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा उस क्षेत्र को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का कार्य करता है।
   आज जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, तब आधुनिक और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण समय की आवश्यकता है। जेवर एयरपोर्ट इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है, जिसके दूरगामी परिणाम आने वाले वर्षों में देखने को मिलेंगे।
    सबसे बड़ा लाभ बेहतर संपर्क व्यवस्था के रूप में सामने आएगा। अभी तक पश्चिमी उप्र के लोगों को हवाई यात्रा के लिए मुख्य रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर निर्भर रहना पड़ता था। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा और आसपास के जिलों के यात्रियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। यातायात जाम और समय की बर्बादी अलग से होती थी। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से लाखों लोगों को अपने घर के अपेक्षाकृत निकट एक आधुनिक हवाई अड्डे की सुविधा मिलेगी। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
  किसी भी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए बेहतर संपर्क व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण शर्त होती है। उद्योगपति और निवेशक हमेशा ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देते हैं, जहाँ सड़क, रेल और हवाई परिवहन की अच्छी व्यवस्था हो। जेवर एयरपोर्ट के कारण पश्चिमी उप्र निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में नए निवेश की संभावना बढ़ेगी। इससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ तेज होंगी एवं विकास को नई गति मिलेगी।
   रोजगार सृजन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हवाई अड्डे के निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। अब जब यहाँ से नियमित उड़ानें संचालित होंगी, तब एयरलाइंस, सुरक्षा सेवाओं, रखरखाव, कार्गो प्रबंधन, परिवहन, होटल, रेस्टोरेंट और खुदरा व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे बड़े शहरों की ओर पलायन भी कम हो सकता है।
    जेवर एयरपोर्ट का एक बड़ा लाभ व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मिलेगा। उप्र कृषि उत्पादन, दुग्ध उत्पादों, हस्तशिल्प और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्गो सुविधा उपलब्ध होने से इन उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक तेजी से पहुँचाया जा सकेगा। विशेष रूप से फल, सब्जियाँ, फूल और डेयरी उत्पाद जैसे शीघ्र खराब होने वाले सामानों के निर्यात को नई गति मिलेगी। इससे किसानों और छोटे उद्यमियों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
    पर्यटन उद्योग के लिए भी यह अड्डा वरदान साबित हो सकता है। जेवर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ से आगरा, मथुरा, वृंदावन और अन्य ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। ताजमहल देखने आने वाले विदेशी पर्यटकों को अब दिल्ली से लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। इससे पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएँ खुलेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। होटल, परिवहन सेवाएँ, गाइड, हस्तशिल्प विक्रेता और छोटे व्यवसायी सभी इससे लाभान्वित होंगे।
एयरपोर्ट के आसपास रियल एस्टेट गतिविधियों में पहले से ही तेजी देखी जा रही है। भूमि के मूल्य में वृद्धि हुई है और निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि विकास संतुलित और योजनाबद्ध हो। अनियंत्रित भूमि कारोबार और अटकलों के कारण स्थानीय लोगों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है, कि भविष्य में जेवर क्षेत्र एक ‘एरोट्रोपोलिस’ के रूप में विकसित हो सकता है। एरोट्रोपोलिस का अर्थ है- ऐसा आधुनिक शहर जिसका विकास हवाई अड्डे के आसपास केंद्रित हो। दुनिया के कई देशों में ऐसे शहर आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। इनमें उद्योग, कार्यालय, तकनीकी पार्क, शैक्षणिक संस्थान, सम्मेलन केंद्र, मनोरंजन सुविधाएँ और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होते हैं। यदि सही योजना और दूरदर्शिता के साथ काम किया जाए तो जेवर भी आने वाले वर्षों में भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।
हालाँकि, विकास के साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी होती हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण सड़क, जलापूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि एयरपोर्ट के आसपास विकसित होने वाले क्षेत्रों के लिए समग्र और दीर्घकालिक योजना बनाई जाए। केवल भवन और उद्योग स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नागरिक सुविधाओं का भी समान रूप से विस्तार करना होगा।
पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। बड़े बुनियादी ढाँचे के निर्माण से भूमि उपयोग और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए हरित विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा भी महत्वपूर्ण है। जिन किसानों और ग्रामीणों ने इस परियोजना के लिए अपनी भूमि दी है, उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है। कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार अवसरों और सामाजिक सुविधाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विकास का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित न रहे, बल्कि गाँवों और सामान्य नागरिकों तक भी पहुँचे।
जेवर एयरपोर्ट की सफलता काफी हद तक इसकी अन्य परिवहन प्रणालियों से जुड़ाव (कनेक्टिविटी) पर निर्भर करेगी। यदि इसे एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, रेलवे और माल परिवहन नेटवर्क से प्रभावी रूप से जोड़ा जाता है, तो इसकी उपयोगिता कई गुना बढ़ जाएगी। इस दिशा में चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करना अत्यंत आवश्यक है।
कहा जा सकता है कि जेवर एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदे
यह हवाई अड्डा केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जाएगा, बल्कि लाखों लोगों के सपनों, आकांक्षाओं और समृद्धि की उड़ान का भी माध्यम बनेगा।