कुल पृष्ठ दर्शन :

प्रेम सच में एक झरना है, शुद्ध भावना

मुम्बई (महाराष्ट्र)।

प्रेम सच में एक झरना है। यह शुद्ध एक भावना है। इसकी कोई मंजिल नहीं। इसका कोई गंतव्य नहीं। प्यार में कुछ खोना या पाना नहीं होता। यह तो एक बहती धारा है।
   यह विचार कथाकार-पत्रकार हरीश पाठक ने चित्रनगरी संवाद मंच द्वारा पहले सत्र ‘सृजन संवाद’ के अंतर्गत कथाकार, शिक्षाविद व पटकथाकार डॉ. रवींद्र कात्यायन की कहानी ‘प्यार एक झरना है’ के कथा पाठ के विमर्श में मुख्य विमर्शकार के नाते व्यक्त किए। कथा पाठ स्वयं लेखक ने किया। अपनी बात रखते हुए श्री पाठक ने कहा, ‘कैफे, संचालिका, कथावाचक, सारा, अरमान और अंत में विवेक के जरिए डिजिटल दुनिया की भूमिका का जो सच कहानी में उतरा है, वह अतुलनीय है।
दूसरे सत्र में रचना पाठ के अंतर्गत अभिनेता दिनेश शाकुल, विविध भारती की पूर्व कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती कमलेश पाठक, प्रदीप गुप्ता, सविता दत्त और देवमणि पाण्डेय ने रचना पाठ किया।
  सुभाष काबरा ने हिंदी कहानी की परंपरा पर अपने विचार व्यक्त किए।। संचालन देवमणि पाण्डेय ने किया।