सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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जीवन निर्माता… (गुरु पूर्णिमा विशेष)…
गुरु त्याग, तपस्या और संयम,
का अर्थ नित्य समझाते हैं
गुरु की होती है विमल बुद्धि,
मम वाणी मधुर बनाते हैं।
गुरु में ब्रह्मा विष्णु रहते,
शिव का निज रूप दिखाते हैं
जीवन के तम सब दूर करें,
और ज्ञान दीप जलवाते हैं।
रक्षा करते तरुवर जैसी,
गुरु प्रेम सुधा बरसाते हैं
निज पथ करते आलोकित वो,
जीवन में सूर्य उगाते हैं।
वे धीर-वीर-गंभीर मृदुल,
वैदिक संस्कार जगाते हैं
निज त्याग तपस्या करुणा से,
नवयुग को मार्ग बताते हैं।
संयम से रहना जीवन में,
अनुशासन का विस्तार करें
सद्गुणों का कर संचार सदा,
गुरु जीवन का उद्धार करें।
अन्तर्मन की दृष्टि खुलती,
गुरु से ही बुद्धि प्रखर होती।
वंदन मैं बारम्बार करूँ,
गुरु कृपा से मैं निर्मल होती॥