नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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जीवन निर्माता… (गुरु पूर्णिमा विशेष)….
आषाढ़ की पूर्णिमा जब आती है,
गुरु-ज्ञान की ज्योति जगाती है
अक्षर-अक्षर का ज्ञान देकर,
जीवन को श्रेष्ठ बनाती है।
अँधेरों में दीप जलाकर,
जीवन की राह दिखाती है
माँ की गोदी से विद्यालय तक,
हर गुरु हमें सही दिशा दिखाता है।
डाँट-डपट कर अनुशासन सिखाते,
सही मार्ग पर चलना बताते हैं
जीवन के हर उतार-चढ़ाव में,
हँसते हुए आगे बढ़ना सिखाते हैं।
निःस्वार्थ भाव से कभी डाँटते हैं,
तो कभी शाबाशी देकर उत्साह बढ़ाते हैं
गुरु पूर्णिमा का यही संदेश है-
ज्ञान जितना बाँटो, उतना बढ़ता है।
कुछ गुरु आध्यात्मिक होते हैं,
जो अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं
सद्गुरु के मार्गदर्शन के बिना,
ईश्वर की अनुभूति कठिन होती है।
ऐसे गुरु जीवनभर साथ रहते हैं,
और शरीर के न रहने पर भी
अपने उपदेशों, संस्कारों और,
आशीर्वाद में शिष्य का मार्गदर्शन करते रहते हैं।
जीवन के हर पड़ाव पर,
और यदि पुनर्जन्म भी हो
तो गुरु की कृपा और उनके संस्कार,
सदैव शिष्य के साथ रहते हैं।
ऐसे सद्गुरु को शत-शत नमन,
जो प्रभु की असीम कृपा से मुझे मिले।
मेरे गुरुदेव कृपालु जी महाराज हैं,
जिनके श्रीचरणों में मेरा कोटि-कोटि प्रणाम॥