नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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हम सभी मिल कर खुशी मनाते,
रहते थे कभी साथ-साथ हँसते-गाते
मोबाइल ने छीना अपनापन, देखते-देखते,
अब किसी से किसी का सम्पर्क नहीं रख पाते।
सब डूबे रहते अपने-अपने मोबाइल में,
सभी को एकान्त ही पसंद आता है
मोबाइल छोड़ना पसंद नहीं करते,
जीवन की यह कैसी रीत बनी है।
यह कैसी विडम्बना, सभी दूरी में रहते हैं,
अपनापन रखे दूर-दूर, कुछ कुछ मेरे जीवन में
जब तक जीवन है, स्नेह की बाती जलती रखे अपने दिल में,
अपने मन पर अनुशासन का पहरा लगा दें।
हम सभी उच्छृंखल होते जा रहे हैं,
एक घर में चार सदस्य रहते हैं
सभी अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं,
पढ़ाई-लिखाई चौपट हो रही है, ध्यान नहीं दे पाते हैं।
ध्यान दें सिर्फ मोबाइल में,
मोबाइल में अच्छाई भी है, हम देखते हैं
आजकल ऑनलाइन पढ़ाई होती है,
अगर मोबाइल न रहे, तो पढ़ाई कैसे पूरी कैसे हो ?
आजकल ऑनलाइन ड्यूटी भी करते हैं,
घर बैठे ऑनलाइन पर आजकल बातें करते हैं
जो पूरे देश में, चाहे जहाँ रहे,
माँ अपने बेटे का चेहरा देख कर प्रसन्न होती और बच्चे खुश होते हैं।
देश-विदेश की खबरें हम भी पल में देखते हैं,
मोबाइल में अच्छाई और बुराई दोनों रहते हैं।
पर मोबाइल ने छीना अपनापन ज्यादा,
इसका सीमित उपयोग करें तो है सबका फायदा॥