हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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धरती के भगवान….
वह हमें ‘जीने’ की राह दिखाते हैं,
हम बीमार हों तो दवाइयां हमें ‘ठीक’ करती है
लेकिन हौसला वह डॉक्टर का सबसे ‘अहम’ होता है,
क्योंकि वह ‘धरती’ के भगवान ही होते हैं।
जीवन-मृत्यु की डोर ‘ईश्वर’ के हाथ में होती है,
उसी मालिक के प्रतिनिधि के रूप में
आज ‘सफेद कोट’ वाले भी हमारे हितेषी होते हैं,
क्योंकि वह ‘धरती’ के भगवान ही होते हैं।
जब कोई भी साथ नहीं देता तो,
हमारे ‘प्राण’ को बचाने वह भी आगे आता है।
मुश्किलों से हमें निकल कर,
हमारा जीवन बचाते हैं,
तभी तो वह ‘धरती’ के भगवान कहलाते हैं॥