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वैज्ञानिक बुद्धि से कविता को ठीक-ठीक समझ पाना मुश्किल

वाराणसी (उप्र)।

भक्ति कवयित्रियाँ साहस के साथ पितृसत्ता का प्रतिरोध रचती हैं। वैज्ञानिक बुद्धि से कविता को ठीक-ठीक समझ पाना मुश्किल है।
      यह बातें शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित मुख्य अतिथि सुभाष राय ने अपने व्याख्यान में कहीं। श्री राय ने अपने व्याख्यान में कहा कि प्राचीन भारत में प्रतिभाशाली स्त्रियों के विचार और साहस की कथाएं दबा दी गई। श्री राय ने नांगली और कन्नगी के उदाहरण सामने रखे। यह व्याख्यान ‘अंडाल और अक्का महादेवीः भक्ति का लोकवृत्त और स्त्री जीवन’ विषय पर आयोजित किया गया था। इसका आरंभ अतिथियों ने महामना पं. मदन मोहन मालवीय और शुकदेव सिंह की छवि पर पुष्पांजलि, दीप प्रज्वलन और कुलगीत गायन से किया। इस अवसर पर आपको शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।

   स्वागत वक्तव्य महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र की डॉ. मीनाक्षी झा ने दिया। विषय की रूपरेखा हिंदी विभाग के प्रो. मनोज कुमार सिंह ने प्रस्तुत की।

 इस अवसर पर केंद्र समन्वयक प्रो. आशीष त्रिपाठी ने श्री राय की २ प्रमुख पुस्तकों पर चर्चा करते हुए बताया कि पितृसत्ता और स्त्री रचना को देखने का नजरिया सुभाष राय की पुस्तकों का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। अध्यक्षीय वक्तव्य में अवधेश प्रधान ने दिया।
   कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग की डॉ. किंगसन पटेल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रज्ञा पारमिता ने दिया।