नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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अहिंसा का पुजारी (गांधी जयंती विशेष)…
भारत देश के राष्ट्रपिता, महात्मा गांधी कहलाते,
सच्ची देशभक्ति थी इनके दिल में
वे सत्य और अहिंसा के पुजारी थे,
देशभक्ति थी उनके मन में।
वे कभी किसी से डरते नहीं थे,
सत्य की राह पर चलते थे
उन्होंने देशहित में अपना तन-मन-धन सब कुछ लगा दिया,
देश की आज़ादी के लिए
अपने प्राण भी समर्पित किए।
वे घुटने तक की धोती पहनते थे,
हाथ में एक लाठी रखते थे
उनका एक ही सपना था-
भारत को आज़ाद कराना
उनके पास अपना घर भी नहीं था,
फिर भी वे देश की सेवा में लगे रहते थे,
वे न बंदूक उठाते थे, न तलवार चलाते थे।
सत्य, अहिंसा और आत्मसंयम पर वे हमेशा डटे रहे,
उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन किया
जिससे आज़ादी का संदेश फैला
वे साबरमती में रहते थे,
इसलिए उन्हें ‘साबरमती के संत’ कहा जाता था।
‘नमक सत्याग्रह’ करके उन्होंने
अंग्रेज़ों को चुनौती दी,
चरखा चलाकर देशवासियों को
स्वदेशी की राह दिखाई
घर-घर चरखा चलवाया, सूती धागे कातना सिखाया,
उस धागे से बने कपड़ों को देशवासियों ने अपनाया।
अंत में प्रार्थना सभा में,
उन्हें गोली मार दी गई।
उनके मुख से निकला ‘हे राम’,
और वहीं उनके प्राण निकल गए॥