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सार्वभौम गणतंत्र हमारा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)

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सारे जहां से अच्छा भारत, उन्मुक्त लहराए तिरंगा।
संविधान पावन धर्मग्रन्थ, अमर रहे गणतंत्र हमारा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

भारत ध्वजा तिरंगा प्यारा,
बढ़े कीर्ति-सम्मान हमारा।
है प्रतीक नित कुर्बानी का, झंडा ऊँचा भारत न्यारा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

शौर्य कीर्ति योद्धा प्रमाण यह, शत्रुंजय शौर्य चक्र हमारा।
नीलगगन निर्मल अनंत यह, हरिता-भरिता धरा हमारा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

धीर-वीर साहस सहिष्णुता, सद्भावन समरस नैतिकता।
है प्रमाण विज्ञान विश्व का, भारत है सोने की चिड़िया॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

उन्मुक्त गगन लहराए झंडा, अमन प्रेम सुख उन्नति न्यारा।
त्रिरंगों का ध्वजा तिरंगा, सार्वभौम गणतंत्र हमारा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

जाति-पाँति बिन भेदभाव का, बिन छुआछूत ऊँच-नीच का।
भाषा हजारों जन कंठहार बन,
भूल भेद सब क्षेत्रवाद का॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

यायावर पथ निरत निरन्तर, ध्वजवाहक संवाहक न्यारा।
बाधित दुर्गम कँटिल विषमतर,
संघर्षक प्रतिमान तिरंगा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

पार्थ सार्थ गांडीव चक्रधर, प्रलयंकर बलधाम हमारा।
महाकाल भोले शिव शंकर, बन महाशक्ति शान हमारा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

शील त्याग गुण कर्म समन्वित,
सुख परहित मन सोच हमारा।
समता ममता नारी शक्ति पूजित,
मुस्कान खिले जनता न्यारा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

महके खुशबू लोकतंत्र का, चलें साथ मिल जनमन सारा।
रहे एक निरपेक्ष स्वराज्य यह, हो भारत भाल तिरंगा प्यारा॥
है ध्वजा वतन तिरंगा प्यारा…

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥