कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)…
मन नहीं मानता अब नहीं रहीं,
पर सत्य तो सत्य है
दीनानाथ की थी लाड़ली,
पर जीवन ने किया घात
हर पल संघर्ष, संकट घेरे रहा जीवन।
दिल में था जुनून,
मन में था ठाना
नहीं पालना है पेट,
किसी और के सहारे
ना थी किसी से कोई खास पहचान।
घर से तो सबने निकाला,
चल पड़ी कुछ कर दिखाने को
संघर्ष और जुनून से सब राहें हुई आसान,
जो भी मिला काम, कभी ना न कह पाई
पेट और जीत की चाहत में संघर्ष किया।
शुरू-शुरू में बहुत से कष्ट आए,
पर लाई वेस्टर्न गाने को
गाने भी गाए ऐसे झूम उठे सब,
उनका था यही कहना
काम करने में ना शर्माना कभी।
जिसको अपना काम आता,
उसको मिल जाता आत्मबल
रही उससे खुशी हमेशा दूर,
उनके गानों ने दी सबको खुशी।
आज हम नम आँखों से देते हैं,
आशा भोसले को श्रद्धांजलि॥