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हेमंत स्मरण हुआ अविस्मरणीय

भोपाल (मप्र)।

संभावनाशील युवा कवि स्व. हेमंत के जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच ने उन्हीं की कविताओं का पाठ करके उन्हें रचनात्मक श्रद्धांजलि दी। हेमंत के कविता संग्रह ‘मेरे रहते’ में संकलित रचनाओं के पाठ की विशिष्ट गोष्ठी (आभासी) आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश में बसे साहित्यिक साथी शामिल हुए।
   इस अवसर पर संचालन करते हुए महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने कहा कि समय की धारा बहुत कुछ बहा ले जाती है, पर कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो समय के जल पर नहीं, हृदय की शिला पर लिखे जाते हैं। हेमंत भी ऐसी ही अमिट अनुभूति हैं। कविता के रूप में उनकी स्मृतियाँ अब भी इस वातावरण में सुवास की तरह तैर रही हैं।
शुभारंभ सुश्री जया आर्य की विशिष्ट सरस्वती वंदना से हुआ। डॉ. प्रमिला वर्मा ने हेमंत के व्यक्तित्व से जुड़ी बातें बताते हुए स्मृतियों का मंथन किया।
मंच अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि मैं आज आभार नहीं दूँगी। हेमंत अब मेरा रहा कहाँ, अब वह आप सबका हो गया। एक हेमंत खोकर मैंने उसकी स्मृति में ‘हेमंत स्मृति कविता सम्मान’ से पुरस्कृत बहुत सारे हेमंत पा लिए।
दिवंगत कथाकार पत्रकार स्व. अवधेश प्रीत ने हेमंत स्मृति पुरस्कार समारोह के लिए जो पंक्तियाँ हेमंत के लिए लिखकर भेजी थीं, उन्हें रानी सुमिता ने पढ़ा। लेखिका डॉ. नीलिमा रंजन ने पुस्तक ‘मेरे रहते’ की भावों से भरी समीक्षा की और उनकी कविताओं का वाचन किया।
    शेफालिका श्रीवास्तव-बसंत, मुजफ्फर सिद्दीकी-बस इतना, जया केतकी- मेरे रहते, गिरिजेश सक्सेना-पतझड़ और सरस दरबारी ने ‘लौट नहीं पाऊँगा’ आदि शीर्षक से रचनाओं का पाठ करके इस संध्या को अविस्मरणीय बना दिया।